हादसे के चार प्रमुख पहलू
सूत्रों के अनुसार, बस में 85 के करीब यात्री भरे हुए थे, जबकि क्षमता मात्र 36 सीटों की थी। एक जगह ड्राइवर ने ओवरलोडिंग के कारण बस चलाने से मना किया, लेकिन यात्रियों ने जबरदस्ती की और हाथापाई तक हो गई। तीसरा, हादसास्थल पर गहरे गड्ढे, जमा पानी और बर्फ की चादर ने बस को फिसला दिया। चौथा, सरकार ने पर्याप्त सरकारी बसें नहीं चलाईं, जिससे ओवरलोडिंग की समस्या बढ़ गई और निजी बसें असुरक्षित रूप से भरी जा रही हैं।
SDM कार्यालय के सूत्रों का खुलासा
SDM ने कई बार PWD को अवगत कराया कि बजट न होने पर भी सरकारी निर्देशानुसार गड्ढों में मिट्टी भर दी जाए, लेकिन विभाग ने अनदेखी की।यह लापरवाही सड़क सुरक्षा को खिलौना बना रही है, जहां रोज हादसे हो रहे हैं। सरकार की बस सेवाओं की कमी और सड़क रखरखाव की उदासीनता निर्दोष जिंदगियों पर भारी पड़ रही है।
बस मालिक परिवार भी था बस में मौजूद
बस मालिक प्रताप सिंह के दो भतीजे—9 वर्षीय रियांशी और 4 वर्षीय कायन—की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य PGIMER में भर्ती हैं। यह घटना ओवरलोडिंग, सड़क रखरखाव और सरकारी बसों की कमी की चाक-चौबंद विफलता दिखाती है। सरकार को तत्काल जिम्मेदारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
