पोस्टर में कुलपति (VC) पर भी व्यंग्य किया गया है, जिससे मामला और गरमा गया है।
क्या है पूरा मामला?
छात्रों का कहना है कि परिसर में निर्धारित पार्किंग स्थल पर्याप्त नहीं हैं। अकादमिक भवनों, लाइब्रेरी और विभागों के बाहर तक गाड़ियां खड़ी हो रही हैं। पैदल चलने वाले छात्रों को सड़क के बीच से गुजरना पड़ता है। ट्रैफिक जाम और ध्वनि प्रदूषण आम बात हो गई है।
एक छात्र ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि “विश्वविद्यालय शिक्षा का केंद्र है, लेकिन यहां अब हर तरफ गाड़ियां ही गाड़ियां दिखती हैं। यह न तो सुरक्षित है और न ही पर्यावरण के अनुकूल। छात्र ने कहा कि जब कोई VIP विश्वविद्यालय आता है तो रातोंरात गाड़ियां हटा दी जाती हैं कैंपस खाली रखा जाता है लेकिन छात्रों की कोई चिंता नहीं है।
बढ़ता प्रदूषण और पर्यावरणीय चिंता
HPU का परिसर घने देवदार और प्राकृतिक हरियाली के लिए जाना जाता है। लेकिन लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या से कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है। वायु गुणवत्ता प्रभावित हो रही है तथा ध्वनि प्रदूषण से शैक्षणिक वातावरण बाधित हो रहा है। पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व शोधों में यह सामने आया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में वाहनों का उत्सर्जन लंबे समय तक वातावरण में बना रहता है, जिससे वायु गुणवत्ता पर अपेक्षाकृत अधिक असर पड़ता है।
