हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 1987 से पहले भारत में जन्मा हर व्यक्ति कानूनी रूप से देश का नागरिक

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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने नागरिकता और पासपोर्ट नियमों पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्मा हर व्यक्ति कानूनी रूप से भारतीय नागरिक है। कोर्ट ने मनाली निवासी महिला को नेपाली बताने वाली पुलिस रिपोर्ट रद्द कर दी।

मनाली के पतलीकूहल की रहने वाली शीतला देवी ने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। पुलिस वैरिफिकेशन के दौरान स्थानीय प्रशासन ने ग्राम पंचायत के हवाले से प्रतिकूल रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट में महिला और उसके बेटे को नेपाल का मूल निवासी बता दिया गया। इसके आधार पर क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने पासपोर्ट रोक दिया था।

याचिकाकर्ता के पास सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया वैध जन्म प्रमाण पत्र मौजूद था। इसके मुताबिक महिला का जन्म 3 मई 1972 को कुल्लू जिले के पतलीकूहल में हुआ था। पंचायत प्रधान ने भी अपनी जांच में उसे भारतीय बताया था। प्रशासनिक रिपोर्टों में भारी विरोधाभास दिखने के बाद महिला ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 3 का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि महिला का जन्म भारत की सीमा में हुआ है, इसलिए वह जन्म से भारतीय नागरिक है। किसी भी सूरत में उसे विदेशी या नेपाली नागरिक नहीं ठहराया जा सकता और न ही पासपोर्ट रोका जा सकता है।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को अपनी गलती सुधारने के सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने पुलिस को दो सप्ताह के अंदर नई और सकारात्मक वैरिफिकेशन रिपोर्ट जारी करने का आदेश दिया। इसके साथ ही पासपोर्ट कार्यालय को सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करके जल्द से जल्द महिला का पासपोर्ट जारी करने का आदेश मिला।

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